
परिचय
1 नाम -मीरा गौतम ‘राकेश’
2 पिता का नाम – प्रो. एस. आर. राकेश
3 माता का नाम- श्रीमती रमा राकेश
4 पति का नाम – श्री
पी.एन.गौतम (एडवोकेट)
5 संतान- ईश्वर की असीम कृपा से दो संतान बहुत ही होनहार,पुत्र और पुत्री के रूप में प्राप्त हुई ।
6शैक्षणिक योग्यता -एम.ए. ,एम.फिल.हिन्दी ,बी.एड.,प्रभाकर
7 शिक्षण अनुभव – लगभग तीस वर्ष
8 शिक्षण सेवा -आत्म पब्लिक स्कूल, लधियाना ,
कुन्दन विद्या मंदिर, लुधियाना ,अग्रसेन पब्लिक स्कूल, कुरुक्षेत्र, डी ए वी पब्लिक स्कूल, कुरुक्षेत्र,
गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र। गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कुरुक्षेत्र , प्राचार्या (प्रतिनियुक्ति पद पर, कुछ समय के लिए )
9 सदस्य – अखिल भारतीय साहित्य परिषद, कुरुक्षेत्र।
अदबी संगम,
आकाशवाणी कुरुक्षेत्र से समय समय पर विभिन्न वार्ताओं में भागीदारी करती रही हूं ।
10 मिर्जापुर कॉलोनी में चल रही एन.जी ओ. ‘चेतना ‘ संस्था ,जो शिक्षण कार्य में कार्य रत रहती है , की मैं वर्तमान प्रेसीडेंट हूं ।
11 अनेक स्थानीय संस्थाओं द्वारा विभिन्न नागरिक सम्मान द्वारा सम्मानित।
12 2016,2017 में कक्षा नवम व दशम के लिए मैने दो संदर्भ पुस्तकें लिखी थी ,जो लक्ष्मी पब्लिकेशन, नयी दिल्ली ,द्वारा प्रकाशित हुई थी।
13 लिखने का संस्कार पूजनीय पिता से विरासत में मिला ,लेकिन मैंने अपने लेखन को कभी गम्भीरता से नहीं लिया ,कुछ भी लिखा और उसे यूं ही छोड़ दिया ।आज सोशल मीडिया का अद्भुत प्रदर्शन देखा तो मुझे अपने लेखन कौशल का आभास हुआ ।
14 आदरणीय डाॅ सुभाष, आप के प्रति हार्दिक आभार, आपने अपने काव्य जगत में मुझे स्थान दिया । समाज के प्रति अपने दायित्व को अपनी लेखनी द्वारा पूर्ण कर सकूं ,ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है ।
सचल के बिना हम अचल
स से सम्पूर्ण, च से चमत्कारी ,ल से लाभ
‘सम्पूर्ण चमत्कारी लाभ देने वाला यह उपकरण,
किसी विशेष उद्देश्य से बना ,ये हमारे जीवन का अलंकरण।
यह तो मात्र एक यंत्र है ,जो न सदुपयोग जानता है न दुरुपयोग,
मनुष्य की अपनी मानसिकता ने उसे पंगु बना दिया ,
क्योंकि उसने स्वयं ही स्वयं को इस छोटे से यंत्र का गुलाम बना लिया ।
मोबाइल की इस क्रांति ने किया सबको बेचैन है,
विज्ञान की इस खोज ने दी सबको एक नई देन है ।
लिखना, पढ़ना ,खेलना सब स्थिर हुआ ,एक अंगुली ने पाया वर्चस्व है ,
घर घर छाया सन्नाटा.,खो गया सर्वस्व है ।
मशगूल हैं फोन के सान्निध्य में ,उसी से हो रहे संवाद ,इन्हीं संवादों ने बढ़ाये जीवन में विवाद ,अपनत्व सारा खो गया ,जीवन बना जी का जंजाल।
विज्ञान ने फोन को स्मार्ट बना कर ,स्मार्ट के अर्थ को ही बदल दिया ,नई नई तकनीकों ने मानव जीवन की स्मार्टनेस को ही बलाॅक कर दिया है ।
टचस्क्रीन का टच तो ,सब करते हैं अनुभव, दिल का दिल से टच ,सभी के लिए होता जा रहा असंभव।
आमने सामने मिले तो अरसे बीत गये, पर फेसबुक पर मिलने को तरसते रोज़ हैं ।
जीवन को सुविधाजनक बनाय इसी मोबाइल ने ,रोज़मर्रा के हमारे कार्यों को सरलता की श्रेणी में लाया भी ,इसी मोबाइल ने ।
हे मनुष्य, इस उपकरण को दोष मत दे ,विज्ञान ने बनाया इसे हमारी सुविधा के लिए, पर तूने इस का उपयोग किया अपनी सुविधी के लिए।
उपकरण है यह ऐसा ,आज जिसके बिना ,हम अधूरे हैं,
उपयोग इसका यदि हम उचित करें ,तभी आज के युग में काम हमारे पूरे हैं ,काम हमारे पूरे.हें ।
स्वरचित
मीरा गौतम’ राकेश ‘
हिन्दी प्रवक्ता (सेवानिवृत्त)
गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र।
कविता का शीर्षक है ,सिंदूरे बलिदान।
तेरे यहां इसे कोई जानता नहीं ,ये तेरा दुर्भाग्य है ।
संस्कार और संस्कृति हमारी , है वो इतनी प्रभावशाली ,
क्योंकि वो पहले प्रहार करता नहीं ,फिर शिकार छोड़ता नहीं
अंजाम अब तूने देख लिया ,तेरे लिए ये केवल रंग लाल है ,
इसी लाल रंग ने कर दिया तुझे कंगाल है ।
न्याय की इस अखंड प्रतिज्ञा का ,सशस्त्र बलों को सलाम है
क्योंकि इन्होंने सिंदूर उजाड़ने वालों को ही उजाड़ कर कर दिया बेहाल है ।
शास्त्र गवाह है,जिस जिस ने भी स्त्री के सौभाग्य को ललकारा है ,
चाहे वो रावण हो या हो कंस
राम और श्याम ने आकर उन्हें धिक्कारा और मारा है ।
नाम लेने वाला न बचा उनका कोई, ऐसी करने वालों के कुकृत्यों का यही एक अंजाम है ।
आतंक के वीभत्स चेहरे,
तू याद रख ,दिन वो अब दूर नही ,जब मेरा भारत अखंड कहलाएगा,पी ओ के हमारा होगा ,तू देखता रह जाएगा ।
20 अप्रैल 2025 की घटना
सिंदूरे बलिदान मेरी बहन बेटियों का
कभी व्यर्थ नहीं जाएगा कभी व्यर्थ नहीं जाएगा ।
मीरा गौतम ‘राकेश
हिन्दी प्रवक्ता (सेवा निवृत्त)
गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र।