Welcome to the world of POET AND GAZAL KAR NARENDER SHASTRI
कवि गजलकार नरेंद्र शास्त्री की दुनिया में आपका स्वागत है

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© इस पृष्ट की समस्त बोधिक सम्पदा नरिंदर शास्त्री के पास सुरक्षित है बिना पूर्व लिखित अनुमती के किसी भी भाग की अनुकरण पुनर्प्रकाशन या वितरण प्रबन्धित है
©COPY RIGHT OF THIS PAGE IS HELD BY NARINDER SHASTRI. ALL RIGHTS RESERVED


परिचय

परिचय

नाम नरेंद्र शास्त्री
पिता प. श्री नरेश कुमार शास्त्री
माता श्रीमती कांता रानी
गांव धीरपुर
जिला कुरुक्षेत्र हरियाणा
शिक्षा विशारद, शास्त्री,शिक्षा शास्त्री,M.A हिंदी, M.A संस्कृत,M.ed
भाषा ज्ञान हिंदी , संस्कृत,अंग्रेजी,पंजाबी
पुरस्कार भाषा रत्न
अदबी संगम से जुड़ाव गत 4 वर्षों से
संपर्क सूत्र 9017239205
Email nsharma0590@gmail.com

POST 1

अना ने गलत काम कभी करने नहीं दिया
हमने सुख का अमृत कभी नहीं पिया
साथ तो रहा पर कभी हंस कर नहीं जिया वह मेरे जख्मों को कुरेदता रहा बार-बार
पर कभी उसने मेरा एक जख्म भी नहीं सिया
अजब दस्तूर है कि वह मेरा सब कुछ ले गई मगर उसने आज तक मुझे अपना भरोसा भी नहीं दिया
मेरे और उसके दरमियां कुछ खास फासला नहीं है
मगर उसने मेरी तरफ कभी हाथ दोस्ती का नहीं किया
मेरे बाल सफेद हो गए उसे समझाते समझाते
कहर खुदा का कि उसने मुझे ही पागल बता दिया
एक आखरी मौका था कि मैं उसे अपने दिल में बिठाया
वह इतनी बेवफा निकली कि मेरा दिल तक जला दिया ।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरुक्षेत्र
9017239205

POST 2

अना ने गलत काम कभी करने नहीं दिया
हमने सुख का अमृत कभी नहीं पिया
साथ तो रहा पर कभी हंस कर नहीं जिया वह मेरे जख्मों को कुरेदता रहा बार-बार
पर कभी उसने मेरा एक जख्म भी नहीं सिया
अजब दस्तूर है कि वह मेरा सब कुछ ले गई मगर उसने आज तक मुझे अपना भरोसा भी नहीं दिया
मेरे और उसके दरमियां कुछ खास फासला नहीं है
मगर उसने मेरी तरफ कभी हाथ दोस्ती का नहीं किया
मेरे बाल सफेद हो गए उसे समझाते समझाते
कहर खुदा का कि उसने मुझे ही पागल बता दिया
एक आखरी मौका था कि मैं उसे अपने दिल में बिठाया
वह इतनी बेवफा निकली कि मेरा दिल तक जला दिया ।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरुक्षेत्र
9017239205

POST 3

जी सुनिए कुछ हाथ पकड़ने लायक नही होते
हर लंबे बालों वाले खलनायक नही होते
दर्द चाहे कितना भी हो हां मर्द नहीं रोते
और ये आंसू तो हीरे मोती हैं जीवन के
जिंदगी के जोहरी इन्हें ऐसे ही नही खोते
परख हो जाती है आदमी के शब्दों से ही
अच्छे लोगों के बहुत ज्यादा दोस्त नहीं होते
और हमारी आंखों से आपको ये नही लगता
किसी की याद में हम रात भर नही सोते
किनारा मिल ही जाता हमे भी सुन हमसफर
तुझसे हाथ ना मिलाया होता तो हम बीच भंवर नही होते।।
नरेंद्र शास्त्री
अभी अभी

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POST 4

जोडकर अक्षर मैं बच्चों को पढाता हूँ ।
नित नए संस्कार मैं बच्चों को सिखाता हूँ ।
मैं दीपक सा खुद जलकर राह लोगों को दिखाता हूँ ।
मैं शिक्षक हूँ अक्षर की इमारत बनाता हूँ ।
अ अनपढ़ को ज्ञ ज्ञानी तक ले जाता हूं
मैं शिक्षक हूं अक्षरों की इमारत बनता हूं।
हैं मेरे थैले में सारे गुण साम,दाम दण्ड भेद
सही समय इन सब को आजमाता हूं
मैं शिक्षक हूं अक्षरों की इमारत बनाता हूं।
कलम से तख्ती पर लिखनेका समा भी जीया है मैने
अब कंप्यूटर ओर मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाता हूं
मैं शिक्षक हूं अक्षरों की इमारत बनाता हूं।
नरेन्द्र शास्त्री।शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

POST 5

लिखा जो एक साथ नाम रेत पर।
किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।
तेरी गहरी सी इन आंखों में कोई गैर खूब नहाया होगा
बता मेरे बिन इनमें क्या कोई दूसरा डूबने आया होगा।।
मैंने जो दी थी चूड़ियां नाप फिट था उनका।
नई साजन का कंगन अब तो हाथ में फस कर आया होगा।। लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।
वह पायल के घुंघरू मैंने जो कह कर दो बढ़वाए थे
नई सास ने उनमें से एक तो कम करवाया होगा
लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।
पकड़ी होगी जब गठबंधन की चुनरी तुमने
याद मेरा रुमाल वह खुशबूदार तो आया होगा
लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
किसी लहर ने आन मिटाया होगा।।
पता मुझे है अपनी कहानी अम्मा को भी मालूम थी
सच तुमने डर के मारे बाबूजी से छुपाया होगा
लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
किसी लहर ने आन मिटाया होगा ।।
तुम्हें देख जो हम पत्थर दिल भी दरिया सा बह जाते थे वह नया पागल तुमने अपनी जुल्फों में कैसे भरमाया होगा लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
किसी लहर ने आन मिटाया होगा ।।
चल बस अब यह सब सुनकर रो मत देना
लिखते लिखते सैलाब तो मेरी आंखों में भी आया होगा लिखा जो एक साथ नाम रेत पर
किसी लहर ने आन मिटाया होगा ।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरुक्षेत्र हरियाणा
9017239205 ,8708896493

LOREM IPSUM DOLOR

POST 6

दीये से जलते हैं खुद औरों को राह दिखाई है,
तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।
सही गलत बच्चों को समझाया है,
हमने हमेशा एक नया समाज बनाया है।
शिक्षा की हर नदी हम जैसे समुद्र में समाई है,
तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।।
तख्ती पर अ, आ लिखना सिखाया,
उंगलियों पर गिनती को गिनवाया।
हमने स्कूल में हररोज प्रार्थना करवाई है,
तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।।
पहले मनाए स्कूल में फिर त्योहार घर पर मनाए हैं,
हमीं ने बच्चे कोई डाक्टर कोई शिक्षक बनाए हैं।
ये जो चमकते हैं चांद से बच्चे ये हमारी कमाई है,
तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।।
जय जवान, जय किसान के नारे लगवाए हैं,
जहां के सारे गुण अवगुण बच्ची को बताए हैं।
शिक्षा हमारी धुंधली आंख में सुरमे की सिलाई है,
तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।।
दीये से जलते हैं खुद औरों को राह दिखाई है,
तब जाकर कहीं हमने गुरु की उपाधि पाई है।।
नरेन्द्र शास्त्री
शिक्षक दिवस स्पेशल।।

POST 6

जिन्हें अपना समझ रखा था सारे गैर निकले
जो दबा के रखा था दिल में सुकून की तरह
वह सारे ख्वाब जहर निकले
हमें वफा मिली गांव की गलियों में
बेवफा सारे शहर निकले
उसकी नादानियां समझ कर जिन्हें भूल जाता था
वो उस नादान के कहर निकले
जब वही बेवफा है तो कोई फर्क नहीं पड़ता
अब मेरे जनाजे में चार आदमी चले या पूरा शहर निकले
मुझे उसकी गली से मत ले जाना इस नजर का कोई भरोसा नहीं क्या पता सिर्फ उसी के चेहरे पर जा फिसले
उसे कह देना के डूब गया उसका सूरज ना जाने फिर वह चांद कई वर्षों बाद निकले या ना निकले
नरेंद्र शास्त्री

POST 7

पूजित सदा जगत में नारी
सृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारी
चंद्रयान आकाश उड़ाती
अपने साहस का परचम लहराती
शोभा इनकी सबसे न्यारी
सृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारी
इनका ना था इतिहास भी कम
इनके सत से डर जाता था यम
ये धरोहर रही हैं हमारी
सृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारी
मीरा अहिल्या सीता बनी है
इन्दिरा कल्पना सुनीता बनी है
अब है लक्ष्मी दुर्गा बनने की बारी
सृष्टि सृजन की प्रथमा अधिकारी
पूजित सदा जगत में नारी।।
नरेन्द्र शास्त्री🙏🙏🙏🙏

POST 8

आंखों की भी अब अपनी मर्जी होने लगी है ।
बात खुशी की हो या गम की हर बात पर रोने लगी है ।।सूरज ढला चांद निकला तारे चमके
दिन की तो बात छोड़िए ये आंखें अब रातों में भी जगी है
पानी पिया शरबत पी चाय तक पी डाली।
ये कैसी प्यास है जो अभी तक लगी है ।।
तेरे अल्हड़ स्वभाव में नादानियां बहुत हैं ।
तुझे समझाने में मुझे एक मुद्दत लगी है ।।
वक्त है सावन का और हवा भी ठंडी चली है।
पता करो जंगल में यह बेवफाई की आग क्यों लगी है ।।तेरा मिजाज भी मेरी हरकतों से मिलने लगा है।
यह तेरी हंसी मेरी मुस्कुराहट से मिलने लगी है ।।
जिंदगी ने छीना मुझसे मेरा चैन मेरा सकुन मेरे सपने ।यहां तक कि मेरी सांसे भी ठगी है ।।
आंखों की भी अब अपनी मर्जी होने लगी है ।
बात खुशी की हो या गम की हर बात पर रोने लगी है।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरूक्षेत्र

POST 9

मेरे ख्वाब टूट जाएं ये मैं होने नहीं देता
इसी डर के मारे रात भर उसे सोने नहीं देता
सीने से लगाए रखता हूं याद को तेरी
मैं खुद को दुनिया में गुम होने नहीं देता।।
तुझे कहीं और देखकर दुखी होता है दिल
मगर बेदर्द आंखो को एक पल भी रोने नहीं देता।।
सोने की तरह तपा रहा है इश्क को आग में मुझे
ऐसा है महबूब मेरा ना अपना बना रहा है ना किसी और का होने देता।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरूक्षेत्र हरियाणा
9017239205OR

POST 10

Wमेरी गजलों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा।
दर्द मेरे जख्मों का होगा तेरा अल्फाज होगा।।
तेरी बेवफाई पर कई सवाल उठेंगे ।
भरी महफिल में मैं तुझे दोषी बनाऊंगा।।
न तेरे पास फिर इसका कोई जवाब होगा।
मेरी गजलों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा।।
यह बेरुखी यह अकड़पन सब धरी रह जाएंगी ।
बस याद मेरी तुझे रात भर सताएगी ।।
अकेले में मेरा तकिया भी न तेरा हमराज होगा।
मेरी गजलों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा।।
हम तो नजाकत और सब्र के सागर में डूबे हैं।
बता तूने कब मनाया है जब भी हम रूठे हैं ।।
मरते दम तक भी तुझसे मनाए जाने का ख्वाब होगा।
मेरी गजलों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा।।
बस और ज्यादा जख्मों को कुरेद कर क्या कहूं।
अब कलम श्याही के तौर पर मांगती है लहू ।।
जाने से पहले तेरी यादों की ओढ़नी मेरा लिबाज होगा।
मेरी नजरों में तेरे गुनाहों का हिसाब होगा।।
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र
9017239205
कृपया सभी विद्वत जन इस अनघड़ सी कविता पर अपनी प्रक्रिया जरूर दें।🙏🙏🙏🙏

POST 11

कितने सावन सूखे बीते कितने फागुन फूलों बिन।
कितनी तन्हा कटी हैं रातें
कितने तन्हा बीते दिन।।
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र

POST 12

ये जो माथे पर लकीरें हैं।
दर्द ए बयान की तस्वीरे है।।
किसी के चेहरे पर काम है तो
किसी के ज्यादा है
ये सब अपनी अपनी तकरीरें हैं।।
प्यार हर कोई करता है जिंदगी में
हर कोई रांझा होता है अपने जीवन का
हर किसी की कोई न कोई हीरे हैं।।
हाथ पर नाम तो दुनिया लिख देती है महबूब का ।
हमने तो तेरे खातिर अपने दिल तलक चीरे हैं ।
ढाल तो तेरी हसीन यादें है को सांसों को बचाए रखती हैं।
तेरी अदाएं तो कतल करने वाली शमशीरे हैं।।
ये जो माथे पर लकीरें हैं दर्द ए बयान की तस्वीरें हैं।

POST 13

मेरा हरियाणा मेरे भारत की शान है
यहां आए अर्जुन और कृष्ण भगवान हैं।
दुनिया को जिसका पता नही था यहां वो गीता का अमर ज्ञान है।
मेरा हरियाणा मेरे भारत की शान है
यहां बेटे करते देश सीमा को रखवाली।
बेटी म्हारी धाकड़ पहलवान है।
मेरा हरियाणा मेरे भारत की शान है।
घर की बरकत करती ताई
म्हारा हर ताऊ कर्मठ बड़ा किसान है।
मेरा हरियाणा मेरे भारत की शान है।।
धरती पर क्या क्या गिनवाऊ
कल्पना चावला से हमारी अंतरिक्ष में भी पहचान है।
मेरा हरियाणा मेरे भारत की शान है।।
जन्मा हूं मैं कुरुक्षेत्र में नरेंद्र मेरा नाम है
मुझको मेरी जन्म भूमि पर बहुत ज्यादा अभिमान है।
मेरा हरियाणा मेरे भारत की शान है।।
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र 🙏

POST 14

वो सपने तोड़ता चला गया हम ख्वाब सजाते रहे ।
वो कानो से सुनना चाहता था हम दिल से बुलाते रहे हैं ।।
उसकी सोच में अभी भी कुछ मैल बाकी है।
हम अपने आप को मुद्दतों गंगाजल से नहलाते रहे ।।
हमारा दिल है कि उसकी याद से निकल नहीं रहा है।
बरबस हम अपनी आंखों को हर रोज सुलाते रहे ।।
एक मूर्त बनाई थी उसमें अपने प्यार की हमने ।
वह कमबख्त पत्थर की निकली हम उसे वर्षों बुलाते रहे ।।
जहरीले तीर भी कई गड़े हैं मेरे सीने में ।
जख्म हरे रखने के लिए हम इन्हें गजलों का पानी पिलाते रहे।।
सभी को लगता है कि आंख ही रोती है दर्द में ।
हम दर्दे जुदाई में दिल से खून के आंसू बहाते रहे ।।
वह सपने तोड़ता चला गया हम ख्वाब सजाते रहे।।
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र हरियाणा
9017239205🙏🙏🙏🙏🙏

POST 15

अपने दुश्मनों को सिर पर चढ़ा रखा है।
हमने मामूली चीजों को भी कीमती बना रखा है ।।
चेहरे पर मुस्कुराहट रहती है हमेशा।
सदा बहार जख्मों को दिल में छुपा रखा है।।
योंही नहीं कहते हम साथ चलेंगे तेरे।
हवा में बातें नहीं हमारा इरादा पक्का है।।
जेब में हाथ डालने पर दिल बाग बाग हो जाता है।
आज भी बाई जेब में तेरा वो पुराना खत रखा है।।
तू ही बता कि तू कितना करीब है दिल के मेरे।
ये चाहत दिल से है या यहां भी तेरे साथ कोई धक्का है।।

POST 16

एक शख्स के लिए जीता हूं
मरना भी उसी के लिए होगा
वह हर बार मुझे अपना कहता है
न जाने वो चांद कब हमारा होगा
कब खिलेंगी कलियां इस वीरान चमन में
कब ये बाग तेरी हंसी के फूलों से हरा भरा होगा
कब मेरी किस्मत का सितारा चमकेगा तेरे नाम से
न जाने ये चांद कब हमारा होगा
तेरी हर एक याद से दीवारों को सजा रखा है
हमने खुद को तेरा दीवाना बना रखा है
कल बता देंगे तेरे भाइयों को भी इस बारे में
आगे देखेंगे कब ना जाने क्या-क्या होगा
मालूम है मुझे जैसे शरीफ को तू भी चाहती है
तेरे घर वालों का भी यही फैसला होगा
तेरे हाथों में मेरे नाम की मेहंदी होगी
मेरे सिर पर तेरे नाम का सेहरा होगा
मेरे सिर पर तेरे नाम का सहारा होगा
न जाने वह चांद कब हमारा होगा
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र
9017239205

POST 17

हमने बताई भी बेबसी उसको अपनी।
वो सुनने को तैयार नहीं था।।
अब तो उसको आंखों से ऐसा लगता है।
जैसे वो कभी पहले मेरा यार ही नहीं था।।माना तलखियत में गलती हमसे भी हुई।
पर उसको हमारे भरोसे पर कोई इतबार नही था।।वो महफिले अपनी सजाए बैठा था।
उसको हमारे गम से कोई सरोकार नहीं था।।
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र

POST 18

की हैं हमने उनसे शिकायते बहुत कम।
हम अपने दर्द को पैमाने सा नहीं झलकाते।।
आंखें बस देखती रहती हैं बराबर उन्हें ।
जिनसे हम खफा हो जाए उन्हें दुबारा घर नहीं बुलाते।।
मिले अगर सत्कार तो चले जाते हैं।
यूं हर एक दहलीज पर तो हम भी नहीं जाते।।
लोग खुद्दारी में हाथों तक की लकीरें मांग लेते हैं।
हमसे हमारे हक भी नहीं मांगे जाते।।
नरेंद्र शास्त्री

POST 19

अंधों को रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहा हूं।
बहरों को सुनाने की कोशिश कर रहा हूं।।
सांसे चल रही हैं लेकिन मुझे पता नहीं चलता ।
मैं जिंदा हूं कि मर रहा हूं।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरुक्षेत्र हरियाणा

POST 20

खबर तो मिले कोई उसके वापिस आने की
अफवाहें बहुत हैं उसके शहर छोड़ जाने की

POST 21

कोई उम्मीद ना थी कि तर जाऊंगा।
मुझे शक था कि तुम्हारे बिन मर जाऊंगा।।
पहले तो बेवफाई के दर्द से टूटा था।
अब मैने शराब पी है मैं अकेला घर कैसे जाऊंगा।।

POST 22

मेरे नाम से मुझे न जानो
मेरे काम को देखो
सुबह हो गई चलो
मां बाप के रूप में भगवान को देखो

POST 23

मेरा किस्सा भी सुना उसने
मरहम भी लगाया दुआओं का।
गिरने लगा मैं तो वो सहारा न दे सका अपनी बाहों का

POST 24

मेरे ख्वाबों को तोड़ कर खुश वो भी नहीं है
सुकून ना वहां ना और कहीं है
ये जिंदगी के आसमान में अंधेरा सा छाया हुआ है
ये बारिशों का मौसम नहीं है।।
मैं भी उम्मीदें लगा बैठा हूं पत्थरों से
भूल गया था उनमें तो दिल ही नहीं है।।
नरेन्द्र शास्त्री कुरुक्षेत्र

POST 25

इंतजार करता हूं तेरा उन्हीं पुरानी राहों से।
आज भी पुकारता हूं तुझे इन खुली बाहों से।।
मैं तेरे ही ख्यालों में खोया हूं आ कर जगा ले।
कितना चाहता हूं तुझे मेरी सांसों से अंदाजा लगा ले।।
हर शख्स के हिस्से में मंजिल नहीं होती।
जितना मिला है साथ शिद्दत से निभा ले।।
नरेंद्र शास्त्री कुरुक्षेत्र