© इस पृष्ठ की समस्त बौद्धिक संपदा अधिकार शायर रामेश्वर देव के पास सुरक्षित हैं। बिना पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी भाग की अनुकरण, पुनर्प्रकाशन या वितरण प्रतिबंधित है।

“© Copyright of this page is held by Shayer Rameshwer Dev . All rights reserved.”

परिचय

.परिचय
नाम – रामेश्वर देव
पिता -श्री गोपाल दास
माता -श्रीमती कृष्णा देवी
शिक्षा:-
बी एस डब्ल्यू,
एम.ए.सोशियोलॉजी,
बी.एड ,पी.जी.डी.सी.ए कम्प्यूटर ।
पता -मकान न.-507 गली नं -7 विकास नगर,फुसगढ़ रोड़ करनाल।
मो0=9813232416
साहित्यिक परिचय –
लगभग -530 रचनाएं
कविता,ग़ज़ल, मुक्तक,
प्रकाशित -95 रचनाएं देश विदेश के 48 समाचार पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित।
सांझा संग्रह -5
1.पहली नज़र (सांझा प्रेम संग्रह )इंकलाब पब्लिकेशन।
2.काव्य संगम, संस्कार न्यूज डीडी भारती।
3.साहित्य त्रिवेणी, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत।
4.कभी तेरी आरज़ू में।
5 हरियाणा दर्शन ।
साहित्य से लगाव
1.निरन्तर काव्य गोष्ठी व कवि सम्मेलन में हिस्सा लेना।
2.संस्थापक मन की उड़ान साहित्यिक मंच करनाल हरियाणा।
3.निरन्तर मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित करवाना।
4 बड़े स्तर पर कवि सम्मेलन आयोजित करवाना।
5.वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान मंच के माध्यम से करना।
सम्मान – .
1.ग्लोबल अचीवर्स डॉ बी.आर अम्बेडकर अवार्ड -2022
2.साऊथ एशिया आइडियल अचीवर्स अवॉर्ड -2023
3.इंकलाब पब्लिकेशन द्वारा सम्मान पत्र
4 हरियाणा गौरव सम्मान -2022, साहित्य संगम संस्थान ईकाई (भारत ) द्वारा
5.महादेवी वर्मा गौरव सम्मान 2025
6.जय शंकर प्रसाद गौरव सम्मान 2025
7.निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान 2025
8.# 95 प्रशस्ति पत्र, साहित्यिक इकाईयों द्वारा आनलाईन
9.#105 स्कूलों व 5 आईटी द्वारा सामाजिक कार्यों में प्रशंशा पत्र
10 . कर्मचारी भविष्य निधि संगठन,श्रम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रशस्ति पत्र
11.साहित्यिक, सांस्कृतिक मंचों व संस्थाओं द्वारा सम्मान।
रामेश्वर देव
करनाल
9813232416

Post 1

Lorem ipsum vim ad prima nemore

है खुश कहां गरीब कमाने के बाद भी,
हंसता नहीं पसीना बहाने के बाद भी।
तंग दस्ती तोड़ देती है सपना गरीब का,
खाली है जेब बोझ उठाने के बाद भी।
मज़लूम को इंसाफ भी मिलता नहीं अब,
सारे सबूत आज दिखाने के बाद भी।
किस पे करें भरोसा जमाने में दोस्तों,
दिल टूट ही जाता है लगाने के बाद भी।
ए ‘देव’ चन्द लोगों पे है देश में दौलत,
इतनी मुसीबतों को उठाने के बाद भी।
रामेश्वर 'देव

Post 2

बस्ती है आईनों की तो पत्थर न मिलेगा,
जिद्द छोड़ दो सहरा में समंदर न मिलेगा।
राहें हयात में हमारा हाथ थाम लो,
हम जैसा आप को कोई रहबर न मिलेगा।
उस बेवफा की करें आज किस से शिकायत,
दुनिया में शिकायात का दफ्तर न मिलेगा।
मैं दोस्ती में यार को देता नहीं दग़ा,
ये मेरी आस्तीन है खंजर न मिलेगा।
ये अपना चमन है करो तुम इसकी इफ़ाज़त,
ऐसे कहीं फूलों भरा मंज़र न मिलेगा।
रामेश्वर ‘देव’