
परिचय
डॉ विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ (आई ए एस सेवा निवृत्त) ,
पूर्व प्रधानसचिव एवं वित्तायुक्त हिमाचल प्रदेश सरकार ।
जन्म 17 अप्रैल 1949 , नाहन, ज़िला सिरमौर, (हि:प्र)
पिता- (स्व) नवल किशोर गुप्ता
माता- (स्व) लाजवंती गुप्ता
पत्नि- शशिकिरण , पुत्री- स्मृति किरण , बेटा- विवेक प्रकाश गुप्ता , बहू- शाइना गुप्ता ,दो पोतियाँ, मान्या गुप्ता एवं शिवन्या गुप्ता ।
शिक्षा :- बी ए आनर्ज़ अर्थशास्त्र , एम ए अर्थशास्त्र , पी एचडी अर्थशास्त्र , एल एल बी ( प्रोफेशनल), डिप्लोमा जर्नलिज़्म , एम फ़िल गांधीयन फिलॉसफी ( गोल्ड मैडलिस्ट) , एम ए हयूमन राइटस ( गोल्ड मेडलिस्ट) , इन सर्विसडिप्लोमा यूनिवर्सिटी ऑफ़ ससैक्स लंदन यू के : आई आई एम कोलकाता ।
सम्प्रति :-
नवल प्रयास शिमला, साहित्यिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष :
एडवोकेट दिल्ली / शिमला हाई कोर्ट्स प्रशासनिक प्राधिकरण :
डी ए वी संस्था दिल्ली की मैनेजिंग कमेटी के निर्वाचित सदस्य :
इन्स्टिटूट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स दिल्ली में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर : कई डीएवी स्कूलों की स्थानीय मैनेजिंग कमेटी के चेयरमैन – काँगूँ , मण्डी , मुज़फ़्फ़रनगर, अमेठी , बनारस , ऊँचाहार आदि
ग़ज़ल संग्रह- प्रकाशित
1:- “आओ नई सहर का नया शम्स रोक लें” , 2:- “ बूँद बूँद ग़ज़ल “ 3:- “ पत्ते चिनारों के “ 4:- “त्रिशूल”
काव्य संग्रह 1”चारों दिशाएँ “ 2 “ उतरार्द्ध “ अनुवाद काव्य संग्रह ।
प्रकाश्य ग़ज़ल संग्रह – 1:-“शिलालेख” 3:-“लाक्षागृह”
सम्मान:
1:- नारायणी साहित्य अकादमी नई दिल्ली । 2:- गायत्री शिरोमणि सम्मान । 3:- सोपान साहित्यिक सम्मान । 4:- अनुबंध साहित्य भूषण सम्मान ( 2021) 5:- रचनाकार संस्था कोलकाता 6:- कई दूसरी संस्थाओं द्वारा सम्मानित । 7:- भारतीय भाषा परिषद कोलकाता द्वारा सम्मानित । 8:- नीलाम्बर कोलकाता द्वारा सम्मानित 9:- ट्रू मीडिया संस्था द्वारा सम्मानित । 10:- के बी एस प्रकाशन द्वारा सम्मानित । 11:- युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच दिल्ली द्वारा सम्मानित । 12:- जनवादी लेखक संघ मुम्बई । 13:- सुर संगम संस्था मुम्बई द्वारा सम्मानित । 14:- ग़ज़ल कुम्भ आयोजन में सम्मानित । 15:- अन्य बहुत सी साहित्यिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित- कई लाइफ़ टाइम एचीवमेंट अवार्ड व अनेकानेक समारोहों में मुख्य अतिथि या अध्यक्षता करते हुए सम्मानित किया गया ।
यात्राएँ :- सरकारी / ग़ैर सरकारी
अमेरिका -शिकागो, साँफ्रांसिसको, लॉस ऐंजल्ज , लॉस वेगास , वाशिंगटन डी सी , न्यू जैर्सी , सन्होज़े , केनेडा , यूके , लंडन , पेरिस , लगज्मबर्ग , इटली , स्विट्ज़रलैंड , नीदरलैंड, बेलजियम , आस्ट्रिया इन्ज़बर्ग , जर्मनी मयूनिख , हाइडलबर्ग , मलेशिया , सिंगापुर , साऊथ न्यूज़ीलैंड , आस्ट्रेलिया सिडनी-गोल्ड कोस्ट-, श्रीलंका आदि आदि
पता – स्थाई व सम्पर्क
डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’
आइवरी -065, 4 चौथी मंज़िल , इमार इमराल्ड हिल्स , अपोज़िट प्रज्ञानम स्कूल , सेक्टर – 65 , गुरुग्राम- 122101 : हरियाणा
मोबाइल – 9811169069 – वाहटअैप भी इसी पर
ई मेल – vinjisha55@yahoo.co.in
GAZAL 1
ग़ज़ल 1:-
बहुत दिलकश, बड़े दिलदार हैं, पत्ते चिनारों के
1222-1222-1222-1222
बहुत दिलकश, बड़े दिलदार हैं, पत्ते चिनारों के ,
किसी के इश्क़ में सरशार 1 हैं पत्ते चिनारों के ।
कई रंगों में खिलकर ये बहारों में चमकते हैं ,
न केवल पैरहन,दस्तार2 हैं पत्ते चिनारों के ।
कभी सर्दी के मौसम में ठिठुरते हाथ मलते हैं ,
कभी जलते हुए रुख़सार हैं, पत्ते चिनारों के ।
मुहब्बत में थके युगलों को देते छाँव प्यारी-सी ,
जले दिल वालों को फटकार हैं, पत्ते चिनारों के ।
वनों, नदियों, पहाड़ों, वादियों, झरनों की संगत में,
धरा का जादुई शृंगार हैं, पत्ते चिनारों के ।
कभी सावन की रातों में बिखरती चाँदनी छन-छन,
सदा गाते मधुर मल्हार हैं, पत्ते चिनारों के ।
तटों पर झील के जब नृत्य-रत लहरों के सँग झूमें,
तो फिर अभिसार-रत मनुहार हैं, पत्ते चिनारों के ।
दहकती गर्मियों में है जो रक्तिम कहकशाँ सारी ,
ख़ुदा के नूर का अवतार हैं, पत्ते चिनारों के ।
कहाँ फिर आप पायेंगे ‘शलभ’, मयख़्वार इन जैसा,
बहुत अद्भुत बड़े फ़नकार हैं, पत्ते चिनारों के ।
1. लबालब भरे हुए, उन्मत्त: 2. पगड़ी
GAZAL2
ग़ज़ल 2:-
वो कब तक इश्क़ की नाकाम हिजरत देखती रहती
1222-1222-1222-1222
वो कब तक इश्क़ की नाकाम हिजरत 1 देखती रहती,
मुहब्बत किसलिए अपनी नदामत 2 देखती रहती ।
हुकूमत जब ज़रा-सी बात पर लेने लगी बदले ,
तो क्यूँ जनता भी यह कड़वी हक़ीक़त देखती रहती ।
फिर उसने रास्ता आख़िर चुना दो हाथ करने का ,
ग़रीबी कब तलक उनकी ये वहशत 4 देखती रहती ।
अदीबों के भी अंतर्मन में थी प्रतिशोध की ज्वाला,
वो क्यूँ मजबूर-मुफ़लिस की ये ज़िल्लत 5 देखती रहती ।
उसे पत्थर दिलों के बीच ‘क्यों-कर’ टूट जाना था ,
तो उल्फ़त किसलिए अपनी मलामत6 देखती रहती ।
सियासी ग़लतियों की तो सज़ा सदियाँ भुगतती हैं ,
वतन की ऐसी-तैसी क्या विरासत7 देखती रहती ।
निगहबानी में जिसकी सौ तरह फूलों को खिलना था ,
‘फ़िज़ा’ क्या ‘बाग़वाँ’ की यह सियासत देखती रहती ।
बड़े विध्वंस की दस्तक सुना दी पूरी दुनिया को ,
धरा कब तक ‘शलभ’ अपनी अज़ीयत 8 देखती रहती ।
1 पलायन: 2 शर्मिंदगी : 3 सच्चाई: 4 पागलपन : 5 अपमान
6 निंदा: 7 पीढ़ियाँ: 8 दु ख/दर्द / पीड़ा / यातनाएँ

GAZAL 3
ग़ज़ल 3:-
एक ही करवट न रह करवट बदल कर देख ले
2122-2122-2122-212
एक ही करवट न रह करवट बदल कर देख ले ,
अब ग़मों की चादरों से तू निकल कर देख ले ।
देख ले हर सू खिले हैं प्यार के मंज़र अनेक ,
लम्हा-लम्हा ज़िंदगी से भी बहल कर देख ले ।
नफ़रतें बाँटेगा तो फिर नफ़रतें हाथ आएँगी,
उनके दिल से अपने दिल को ही बदल कर देख ले ।
जिस तरह अपनी ‘अना’ के ताप को ढोता है तू ,
यूँ अगर मर्ज़ी है तेरी यूँ भी जल कर देख ले ।
यह धरा, आकाश, पर्वत, यह समुन्दर फिर कहाँ,
थाम ले जीवन की ऊँगली औ’ मचल कर देख ले ।
वो जो तेरा हमसफ़र है, वो ही सच संसार का ,
वो ख़ुदा है उसके ही पैकर में ढल कर देख ले ।
रंजिशें , शिकवे, गिले, काँटे हैं देंगे ही चुभन,
फूल बन जा ऐ ‘शलभ’ ! ख़ुशबू में ढल कर देख ले ।